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शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

भारतीय अनुवाद परिषद का ‘नातालि पुरस्कार’ प्रो. दिलीप सिंह को


प्रो. दिलीप सिंह 


हैदराबाद, 15 फरवरी 2014.

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मद्रास के कुलसचिव एवं प्रमुख हिंदी भाषावैज्ञानिक प्रो. दिलीप सिंह को भारतीय अनुवाद परिषद, दिल्ली द्वारा अनुवाद के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु वर्ष 2014-15 का ‘नातालि पुरस्कार एवं सम्मान’ प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है. 

परिषद के महासचिव डॉ. पूरनचंद टंडन से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रति वर्ष अनुवाद सिद्धांत पर हिंदी भाषा में लिखित मौलिक पुस्तक के लिए दिया जाने वाला यह पुरस्कार एवं सम्मान प्रो. दिलीप सिंह को उनकी सद्यःप्रकाशित कृति ‘अनुवाद की व्यापक संकल्पना’ पर प्रदान किया जा रहा है. इसके अंतर्गत परिषद द्वारा निकट भविष्य में आयोजित एक भव्य समारोह में इक्कीस हजार रुपए की पुरस्कार राशि, शॉल, प्रशस्ति पत्र, सारस्वत प्रतिमा तथा सम्मान चिह्न प्रदान किए जाएँगे.


उल्लेखनीय है कि एक सुस्थापित स्वयंसेवी संस्था द्वारा प्रदान किए जाने वाले इस पुरस्कार का अपना एक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व है तथा प्रो. दिलीप सिंह को यह पुरस्कार एवं सम्मान जिस पुस्तक पर प्राप्त हो रहा है उसमें अनुवाद शास्त्र पर अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की पृष्ठभूमि में चिंतन करते हुए उन्होंने अनुवाद समीक्षा और मूल्यांकन के विविध व्यावहारिक प्रारूप प्रस्तुत किए हैं जिसे हिंदी अनुवाद चिंतन के क्षेत्र में उनका मौलिक योगदान माना जाता है.


प्रो. दिलीप सिंह को ‘नातालि पुरस्कार’ दिए जाने की घोषणा पर साहित्य, शिक्षा और भाषाविज्ञान क्षेत्र के विद्वानों ने हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त की है.


पुरस्कृत कृति 

रविवार, 18 अगस्त 2013

हर कीमत पर आजादी की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध हों – प्रो.दिलीप सिंह

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में स्वतंत्रता पर्व संपन्न

हैदराबाद, 15 अगस्त 2013.


स्वतंत्रता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जिस राष्ट्रीय आजादी का हम आज स्वच्छंद उपभोग कर रहे हैं उसे इस देश ने लंबे संघर्ष और भीषण यातनाओं के बाद प्राप्त किया है. संघर्षों का यह इतिहास इस दृष्टि से अनोखा है कि एक ओर हमारे किशोर और युवा क्रांतिकारियों ने उपनिवेशी शासन को सशस्त्र चुनौती दी तथा दूसरी ओर सहनशीलता की चरमसीमा तक अहिंसक आंदोलन ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की इस भावना को प्रमाणित कर दिखाया कि अत्याचारी व्यवस्था को भी अहिंसा की ताकत के सामने आखिरकार झुकना ही पडता है. इस संघर्ष की समस्त गाथा तमाम भारतीय भाषाओं के साहित्य में और लोक की स्मृतियों में सुरक्षित है. आवश्यकता है कि हमारी नई पीढ़ियाँ साहित्य में निहित इस राष्ट्रीय चेतना को आत्मसात करें और मिली हुई आजादी की हर कीमित पर रक्षा के लिए संकल्पबद्ध हों. 

ये उद्गार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के कुलसचिव प्रो.दिलीप सिंह ने आंध्र सभा में मुख्य अतिथि के रूप में ध्वजारोहण के पश्चात अपने संबोधन में प्रकट किए. इस समारोह में चवाकुल नरसिंह मूर्ति, शेख मोहम्मद कासिम, शेख जमीला बेगम विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए. 

67 वें स्वतंत्रता पर्व के तहत आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि द्वारा महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई. इसके बाद ध्वज स्तंभ के समक्ष पूजा का सांस्कृतिक अनुष्ठान संपन्न हुआ और ध्वजारोहण के पश्चात अतिथियों ने अपने उद्बोधनात्मक विचार व्यक्त किए. छात्र-छात्राओं ने राष्ट्र चेतनापरक गीत प्रस्तुत किए. समारोह में सभा के विभिन्न विभागों के व्यवस्थापक, प्राध्यापक, कार्यकर्ता और छात्र उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए. 

आरंभ में आंध्र सभा के सचिव सी.एस.होसगौडर ने मुख्य अतिथि का स्वागत-सत्कार किया. संयोजन प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने किया तथा धन्यवाद डॉ.के.बी.मुल्ला ने दिया.



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